ये आखिर क्या है...

मेरी डायरी के पन्ने... कुछ एबस्ट्रैक्ट सा है... एकदम अनगढ़... बिना किसी शेप में... अबूझ सा... या फिर एकदम एबसर्ड बिना किसी मतलब के... जबरदस्ती...एक हठ की तरह... शायद बेतरतीब भी... वाहियात... किसी कूड़े की तरह... जैसे कोई इंटेलेक्चुअल खरपतवार हो... नकारा विचारों को समेटे...... [पूरी पोस्ट]
writer हेमन्त वशिष्ठ
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[23 Dec 2009 15:05 PM]

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