मुझे यकीन है.. तुम आओगे ज़रूर

अर्ज़ है... तुमने तमाम उम्र साथ रहने का वादा तो नहीं किया था.. लेकिन तुम मेरी ज़िंदगी में बहुत आहिस्ता से दाखिल हो गये थे.. मुझे एहसास भी नहीं हुआ. और तुमने मेरे दिल पर हुकुमत कर ली.. मैं तुम्हारी हर अदा और हर इशारे का गुलाम हो गया... हर आहट पर जान देने को तैयार... [पूरी पोस्ट]
writer अबयज़ ख़ान
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[23 Dec 2009 13:10 PM]

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