गद्दार कदम-हिन्दी साहित्य कविता (gaddar kadam-hindi sahitya kavita)

दीपक भारतदीप की शब्द प्रकाश-पत्रिका अपनी खुशियां मिलकर बांटते होते हम। तब नहीं छाये होते पूरे जमाने के दिल में गम। अब जज़्बातों के सौदागर सपने बेच रहे हैं बाजार में लोगों के दर्द पर, करके अपनी आंखें नम। अपने नाम के पैसों खाता देखकर,  खुश हो रहे अमीर बढ़ते आंकड़ों में देख रहे जिंदगी... [पूरी पोस्ट]
writer दीपक भारतदीप

sher

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[23 Dec 2009 12:12 PM]

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