मै भला कब सुधरने वाला हूँ

gazal k bahane आज कुछ कर गुजरने वाला हूँ बन के खुशबू बिखरने वाला हूँ तोड़ दो कसमें, दो भुला वादे मैं तो खुद भी मुकरने वाला हूँ टूटकर बिखरा हूं इस तरह यारो अब कहाँ मैं संवरने वाला हूँ जिन्दगी कर दे हसरतें पूरी खुदकुशी अब मैं करने वाला हूँ देख लो तुम मुझे सजा देकर मै... [पूरी पोस्ट]
writer श्याम सखा 'श्याम'
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[23 Dec 2009 08:45 AM]

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