उसने पुकारा मुझको

zindagi कल का दिन मेरी ज़िन्दगी का वो दिन था जब मैं ज़िन्दगी के करीब था वो जिससे मैंने मिलना चाहा इक नज़र देखना चाहा लाखों पैगाम भेजे मिन्नतें की सदके किये मगर ये सोच पत्थर भी कभी पिघले हैं खामोश हो जाता था और अपनी मोहब्बत से मजबूर हो बार - बार आवाज़ दिए जाता... [पूरी पोस्ट]
writer वन्दना
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[23 Dec 2009 05:59 AM]

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