बारिश
एक नाले के तलहटी से, उभरता और डूबता, खेलता गंदी बस्तियों के कीचड़ भरे, बदबूदार पानी से, एक टुकड़ा इंसानी जज्बात का, पानी से भीगा हुआ, गुजरा मेरे काफी करीब से, और बोला लजाकर, ये न समझना मैं यूं ही जा रहा हूँ, ये तो बम्बई की बारिश है................ राज...
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Blue Monk
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[23 Dec 2009 05:16 AM]



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