सफ़ेद आवाज
सफ़ेद आवाज रात के खामोशियों में, इक अकेली सी चीखने की आवाज़, मेरे जहन के तीसरे कोने तक, समंदर के लहरों सी पसर गयी, टकराई धूल और धूएं से भरे, कानो के फटे हुए पर्दों से, ललाई हुयी आँखों में धुंए सी घुसी और आंसू ले आई. उन आंसू के नकली शहरी मोतियों में, धू...
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Blue Monk
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[23 Dec 2009 05:16 AM]



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