९१ कोजी होम
दोपहर का वक्त था ,मैं घर जा रहा था । जुहू के रास्ते मुझे अपने घर जाना पड़ता है ...जुहू बीच से, जैसे आगे बढ़ा था की... अपने दोस्त शलीम आरिफ साहब को देख कर रुक गया .......हम लोग ,काम -धंदे की बात करने लगे ,मैंने अपनी बीती सुनाई ...कैसे जापान वाली फिल्म...
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भंगार
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[23 Dec 2009 05:07 AM]



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