आज वो शख्श भीड़ में भी तनहा नज़र आता है... हाल ऐ दिल!
उसकी ख्वाहिश थी कुछ तो अलग करने की, इस तरह चलने की और भीड़ से अलग लगने की, शायद कुछ और ही मंज़ूर ख़ुदा को रहा होगा, आज वो शख्श भीड़ में भी तनहा नज़र आता है......
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nadeem
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[23 Dec 2009 03:49 AM]



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