मन-मीत

मनोरमा मन को मीत मिला न मन-सा। भाव-जगत में हूँ निर्धन-सा।। कहने को होते कुछ अपना। लेकिन सच अपनापन सपना। समझौता लाखों कर लें पर, रहता जीवन में अनबन-सा। ‍मन को मीत मिला न मन-सा। भाव-जगत में हूँ निर्धन-सा।। अनजाने में प्यार किसी से। क्या जीवन-व्यवहार उसी से? इ... [पूरी पोस्ट]
writer श्यामल सुमन
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[23 Dec 2009 01:36 AM]

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