आशाओं की आबादी खुशियों की दुनिया
नैना साहिनी, जेसिका लाल और अब आरूषि के दर्दनाक अंत से कौन नहीं दहल गया। जाहिरा शेख आज एक नजीर बन गयी है। इसके बावजूद भी महिलाओं के प्रति पुरुषोचित दमन खत्म होने का नाम नहीं लेता। यह हमारे ही समाज का एक पहलू है। आज महिलाओं को कदम-कदम पर अत्याचार, शोषण...
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विनय जायसवाल
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[23 Dec 2009 01:02 AM]



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