ज़िक्र (एक प्रेम कहानी)-अंतिम भाग
कहते हैं कि ख्वाहिशों का कोई छोर नहीं होता । कहाँ शुरू होती हैं और कहाँ ख़त्म ये पता ही नहीं चलता । कुछ ख्वाहिशें तो ऐसी होती हैं कि खुद ख्वाहिशों को ख्वाहिश करने वाले से प्यार हो जाता होगा । सोचती होंगी कि कितना नेक बंद है जो दिल से इतनी मासूम सी ख्...
[पूरी पोस्ट]
अनिल कान्त :
Love
32
3
0
3
10
[22 Dec 2009 15:31 PM]



Shuffle








