ज़िक्र (एक प्रेम कहानी)-अंतिम भाग

मेरी कलम - मेरी अभिव्यक्ति कहते हैं कि ख्वाहिशों का कोई छोर नहीं होता । कहाँ शुरू होती हैं और कहाँ ख़त्म ये पता ही नहीं चलता । कुछ ख्वाहिशें तो ऐसी होती हैं कि खुद ख्वाहिशों को ख्वाहिश करने वाले से प्यार हो जाता होगा । सोचती होंगी कि कितना नेक बंद है जो दिल से इतनी मासूम सी ख्... [पूरी पोस्ट]
writer अनिल कान्त :

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[22 Dec 2009 15:31 PM]

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