रात भर....

जीवन के पदचिन्ह जागा रात भर, सोया  न बिस्तर बेगाना मेरा, हर करवट सदाएँ देता था सपना पुराना  तेरा. सोचा रात भर, वजहें तेरी बज़्म में आने की, काश मुझको मालूम न होता ठिकाना  तेरा चर्चा रात भर, चलता रहा महफ़िल मे... [पूरी पोस्ट]
writer Sudhir (सुधीर)

रात

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[22 Dec 2009 14:19 PM]

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