अब ईश्‍वर नहीं पहले की तरह उदार...

उनींदरा क्‍या बुरा था...भयानक ठंड और गाढ़े कोहरे के बीच, हाईवे पर हर रात सैकड़ों किलोमीटर गाड़ी चला सकने का जुनून...। और, निहायत यूं ही सी एक छोटी सड़क आत्‍मविश्‍वास को पानी कर देती है...। मित्र नहीं होते प्रतिभाओं और पागलों के... अनसुना करते हुए एक बांई हथे... [पूरी पोस्ट]
writer शायदा

Marina

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[22 Dec 2009 12:22 PM]

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