ज़िक्र (एक प्रेम कहानी) - भाग 2
सर्दियों की गुनगुनी धूप थी, आसमान पंक्षियों के होने से और भी ज्यादा खूबसूरत लग रहा था । पेड़ों ने अपना पुराना लिबास उतारकर नया धारण कर लिया था और उसमें वो कुछ ज्यादा ही खूबसूरत लग रहे थे । कहीं दूर से भीगी हुई धरती की भीनी-भीनी महक आ रही थी जैसे हवाओं...
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अनिल कान्त :
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[22 Dec 2009 08:15 AM]



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