ज़िक्र (एक प्रेम कहानी) - भाग 2

मेरी कलम - मेरी अभिव्यक्ति सर्दियों की गुनगुनी धूप थी, आसमान पंक्षियों के होने से और भी ज्यादा खूबसूरत लग रहा था । पेड़ों ने अपना पुराना लिबास उतारकर नया धारण कर लिया था और उसमें वो कुछ ज्यादा ही खूबसूरत लग रहे थे । कहीं दूर से भीगी हुई धरती की भीनी-भीनी महक आ रही थी जैसे हवाओं... [पूरी पोस्ट]
writer अनिल कान्त :

Love

views
36
upvote
5
downvote
0
rating
5
comments
5
[22 Dec 2009 08:15 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix