लफ्ज़ ,कुछ कहे -कुछ अनकहे ("क्षणिकाएँ..")

कुछ मेरी कलम से -kuch  meri kalam se ** तेरे मेरे बीच तेरे मेरे बीच एक दुआ एक सदा मेरी बेखुदी तेरी बेरूख़ी चटका हुआ आईना काँपता पीले पत्ते सा फिर भी यह रिश्ता जन्म तक यूँ ही चलता रहेगा !! साथ जब मैं उसके साथ नही होती तो वह मुझे हर श्ये में तलाश करता है पहरों सोचता है मेरे बारे में और मिलने... [पूरी पोस्ट]
writer रंजना [रंजू भाटिया]
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[22 Dec 2009 01:30 AM]

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