विदुर नीति-अधिक धन होने पर भी अनुशासन रखना जरूरी (dhan aur anushasan-hindu dharam sandesh)
धर्मार्थोश्यः परित्यज्य स्यादिन्द्रियवशानगुः। श्रीप्राणधनदारेभ्यः क्षिप्र स परिहीयते।। हिन्दी में भावार्थ- नीति विशारद विदुर के कथनानुसार जो मनुष्य धर्म और अर्थ इंद्रियों के वश में हो जाता है वह शीघ्र ही अपने ऐश्वर्य, प्राण, धन, स्त्री को अपने हाथ से...
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दीपक भारतदीप
dharm
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[21 Dec 2009 23:06 PM]



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