अफ़सोस है मुझे

अंतर्द्वंद का आइना हमें सभी के लिए बनना था और शामिल होना था सभी में हमें हाथ बढ़ाना था सूरज को डूबने से बचने के लिए और रोकना था अंधकार से कम से कम आधे गोलार्ध को हमें बात करना था पत्तियों से और इकठ्ठा करना था तितलियों के लिए ढेर सारा पराग हमें बचाना था नारियल के पानी और... [पूरी पोस्ट]
writer V. VIVEK
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[21 Dec 2009 22:32 PM]

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