उर्वशी के नाम पर......
कैद बख्शी है हमें यों ज़िन्दगी के नाम पर ज्यों अंधेरे का कत़ल हो रौशनी के नाम पर और क्या करते भला हम आदमी के नाम पर छल-कपट करते रहे हैं बन्दगी के नाम पर भूख की सौगात बच्चों को मिलेगी भेंट में युद्धरत संसार से नूतन सदी के नाम पर बुतपरस्ती का जुनूं बढ़...
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योगेन्द्र मौदगिल
ग़ज़ल
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[21 Dec 2009 18:57 PM]



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