मंदी के नाम पर और कितना शोषण?

बेबाक टिप्पणी विश्व के अर्थशास्त्रियों का मानना है कि मंदी के बादल लगभग छंट चुके हैं। भारत के वित्त मंत्री भी घोषणा कर चुके हैं कि फिर से रोजगार के नए अवसर खुलने लगे हैं। परंतु भारत के मध्यम निजी कंपनियों और कुछ उच्च कंपनियों में अभी मंदी का दौर खत्म नहीं हुआ है?... [पूरी पोस्ट]
writer रविकांत प्रसाद
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[21 Dec 2009 16:37 PM]

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