प्रवासी हैं , कुबेर नहीं ,!

Hindi Poems by Archana Panda कई दिन पहले आया मुझको इंडिया से एक फोन, मैंने पूछा बड़े प्यार से भाई तुम हो कौन, उत्तर था साहित्य सम्मलेन करना एक है , मैंने कहा - आईडिया बड़ा ही नेक है , आया सवाल - क्या आप अपनी कोई रचना गा पाएँगी? आप इसके हेतु भारत आ पाएँगी? मारे ख़ुशी के कैसी कैसी... [पूरी पोस्ट]
writer kavitaprayas
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[21 Dec 2009 16:00 PM]

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