प्रवासी हैं , कुबेर नहीं ,!
कई दिन पहले आया मुझको इंडिया से एक फोन, मैंने पूछा बड़े प्यार से भाई तुम हो कौन, उत्तर था साहित्य सम्मलेन करना एक है , मैंने कहा - आईडिया बड़ा ही नेक है , आया सवाल - क्या आप अपनी कोई रचना गा पाएँगी? आप इसके हेतु भारत आ पाएँगी? मारे ख़ुशी के कैसी कैसी...
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kavitaprayas
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[21 Dec 2009 16:00 PM]



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