कबीर के श्लोक -२

*साधना* कबीर डगमग किआ करहि,कहा ढुलावहि जीउ॥सरब सूख के नाइको,राम नाम रसु पीउ॥३॥कबीर जी कहते है कि हे प्राणी तू अपने मन को किन बातों मे उलझा रहा है,क्यो तू क्षणिक सुखो मे लग कर अपने मन को बहला रहा है। तुझे तो उस परमपिता परमेश्वर जो कि सभी सुखो का स्वामी है, सभ... [पूरी पोस्ट]
writer परमजीत बाली

अध्यात्मिक

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[21 Dec 2009 15:25 PM]

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