बर्फ के फाहे

स्पंदन     ( SPANDAN) यहाँ आजकल बर्फ पढ़ रही है तो उसे देखकर कुछ ख्याल आये ज़हन में view from my house window . छोटे छोटे रुई के से टुकड़े गिरते हैं नीले आकाश से और बिछ जाते हैं धरा पर सफ़ेद कोमल चादर की तरह तेरा प्यार भी तो ऐसा ही है, बरसता है बर्फ के फाहों सा और फिर ......... [पूरी पोस्ट]
writer shikha varshney

कवितायें

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[21 Dec 2009 09:34 AM]

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