रक़ीब
रक़ीबों के दरमियां कोई हमसाज़ न मिला हमसफ़र दुनिया में कोई दूरदराज़ न मिला लगा बैठे दिल को तेरी चाहत का रोग जो दिल को बहलाने का कोई अंदाज़ न मिला हज़ार ज़ख्म खाकर भी जुबां खामोश रही हाल - ए - दिल को कोई अल्फ़ाज़ न मिला सिसकती रही ज़िन्दगी ठोकरों में उनक...
[पूरी पोस्ट]
अर्चना तिवारी
15
1
0
1
16
[21 Dec 2009 07:09 AM]



Shuffle








