झूलमझूली

एक बूँद झूला झूलने की है ठानी , झूले पर बैठी गुडिया रानी , मन में आया तेज चलाऊं , ऊँची थोडी पेंग बढ़ाऊं , माँ ने बोला, धीरे चलाना , तेज गति से गिर ना जाना , पर उसने ना माँ की मानी, करती रही अपनी मनमानी , तेज उडाने से वो पलटी, गिरी धरा पर होकर उलटी , आंसू टप... [पूरी पोस्ट]
writer pooja
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[21 Dec 2009 05:56 AM]

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