दुनिया-ए-फ़ानी से बेलौस गुज़र गए नीरज कुमार

आज़ाद लब मैं सैनिकों के रानीखेत क्लब में पर्वतराज हिमालय की ओर मुंह किये नंदा देवी की मनोरम चोटी को अपलक निहार रहा था, जो मुझे मिस्र के किसी बच्चा पिरामिड की तरह लग रही थी. वह इतवार की फुरसतिया सुबह थी. 'कबाड़खाना' वाले अशोक भाई खुद को फुर्ती से भरकर मित्रों... [पूरी पोस्ट]
writer विजयशंकर चतुर्वेदी

शायर

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[21 Dec 2009 05:45 AM]

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