ग़ालिब और मीर के मानसिक निर्माण में अंतर

मिर्ज़ा ग़ालिब ग़ालिब ने इश्क़ किया, गृहस्थी बनायी, दोस्ती की, मन की गहराइयों में पैठा लेकिन ऐसा कभी न हुआ कि एक बिंदु पर पहुँच कर रुक गया हो, एक तत्त्व या तथ्य में केन्द्रित होकर रह गया हो । अंतर एवं बाह्य दोनों उसके जीवनानन्द के साधन हैं । 'मीर' में यही न था । वह... [पूरी पोस्ट]
writer अनिल कान्त :
views
27
upvote
3
downvote
0
rating
3
comments
2
[21 Dec 2009 02:48 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix