ग़ालिब और मीर के मानसिक निर्माण में अंतर
ग़ालिब ने इश्क़ किया, गृहस्थी बनायी, दोस्ती की, मन की गहराइयों में पैठा लेकिन ऐसा कभी न हुआ कि एक बिंदु पर पहुँच कर रुक गया हो, एक तत्त्व या तथ्य में केन्द्रित होकर रह गया हो । अंतर एवं बाह्य दोनों उसके जीवनानन्द के साधन हैं । 'मीर' में यही न था । वह...
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अनिल कान्त :
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[21 Dec 2009 02:48 AM]



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