शायद ...इसीलिए परियां अब इस ज़मीन पर नहीं आती
एक माँ ही जब जन्म देती बेटी को तो फिर क्यूँ ऐसे रोती जानती नहीं लाडली बेटियां ही तो माँ की परछाई होती ! कच्ची दीवारों के खोखले रिश्तो से अनजान हंसती गाती रुनझुन रुनझुन क़दम बढ़ाती छन छन से पायल छनकाती ! कभी दस्तूरों तो कभी रिवाज़ के हाथों पल पल सताई जा...
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Akanksha
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[21 Dec 2009 02:04 AM]



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