शायद ...इसीलिए परियां अब इस ज़मीन पर नहीं आती

PRAKAMYA एक माँ ही जब जन्म देती बेटी को तो फिर क्यूँ ऐसे रोती जानती नहीं लाडली बेटियां ही तो माँ की परछाई होती ! कच्ची दीवारों के खोखले रिश्तो से अनजान हंसती गाती रुनझुन रुनझुन क़दम बढ़ाती छन छन से पायल छनकाती ! कभी दस्तूरों तो कभी रिवाज़ के हाथों पल पल सताई जा... [पूरी पोस्ट]
writer Akanksha
views
18
upvote
2
downvote
0
rating
2
comments
16
[21 Dec 2009 02:04 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix