वक़्त नहीं - इस भाग दौड़ भरी जिन्दगी में

जिन्दगी की पाठशाला हर ख़ुशी है लोगों के दामन में, पर एक हंसी के लिए वक़्त नहीं. दिन रात दौड़ती दुनिया में, ज़िन्दगी के लिए ही वक़्त नहीं. माँ की लोरी का एहसास तो है, पर माँ को माँ कहने का वक़्त नहीं, सारे रिश्तों को तो हम मार चुके, अब उन्हें दफ़नाने का भी वक़्त नहीं. सार... [पूरी पोस्ट]
writer Bhavesh (भावेश )
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[21 Dec 2009 00:52 AM]

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