दायित्व
डा. बलदेव सिंह खहिरा “देख बापू! मुझे आए महीना भर हो गया। सभी रिश्तेदारों से पूछ लिया है, कोई भी आप दोनों को रखने के लिए तैयार नहीं। इस वृद्धावस्था में मैं आपको अकेले इस कोठी में नहीं छोड़ सकता। आप अपना लुक आफ्टर कर ही नहीं सकते।” माता-पिता को खामोश द...
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दीपशिखा
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[20 Dec 2009 21:04 PM]



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