शायरी (एक नज़र)

अंतर्द्वंद का आइना इश्क के गुलशन को गुल गुज़र न कर! ऐ नादान इंसान कभी किसी से प्यार न कर! बहुत धोखा देतें हैं मोहब्बत में हुस्न वाले इन हसीनो पर भूल कर भी ऐतबार न कर! मौसम के हर वक़्त को बदलते देखा है! चांदनी के लिए चाँद को तरसते देखा है! जिसे लोग कहते हैं आंसू उन्हीं... [पूरी पोस्ट]
writer V. VIVEK
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[20 Dec 2009 09:07 AM]

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