ग़ालिब पर मीर का प्रभाव
ग़ालिब मीर से काफी प्रभावित थे । अनेक स्थाओं पर भाव क्या शब्द तक टकरा गये हैं । खुद ही देख लीजिए : मीर: होता है याँ जहाँ मैं हर रोज़ोशब तमाशा, देखो जो ख़ूब तो है दुनिया अजब तमाशा । ग़ालिब : बाज़ीचए इत्फाल है दुनिया मेरे आगे, होता है शबोरोज़ तमाशा मेरे...
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अनिल कान्त :
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[20 Dec 2009 08:49 AM]



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