जीए तेरे लिए....
चंद पंक्तिया जाने कहाँ से निकली...और कलम के रास्ते पन्नों पर उतर गई...और आज कीबोर्ड के सहारे ब्लॉग पर..... मेरे दिल के टूटने की कसक उन्होंने सुनी नहीं हँसतें हुए मेरे लबो को देख वो चहकती रहीं और मैं मुस्कराहट मैं ही दर्द पीता रहा.... दर्द भले मेरा कभ...
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boletobindas
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[20 Dec 2009 07:15 AM]



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