सचिन की आवारगी को सलाम
सचिन की नई इबारतें लगातार पढ़ता हूं। सचिन को जानता हूं, उनकी आवारगी बेहद भाती है। एक ऐसा शख्श, जो पैदा ही हुआ, शायद दुनिया की तहजीबों को पलीता लगाने के लिए। उनकी जिस्मानी सीरत चाहे जैसी भी हो, उनके व्यक्तित्व के ढेरों रंग हैं। अमर उजाला में एकबार सचि...
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घन्नू झारखंडी
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[20 Dec 2009 06:47 AM]



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