मज़ा आता है शायद तुम्हें यूँही जीने में

साहित्य-सहवास रुत रंगीली है सीली सीली है पवन नशीली है देह भी गीली है ____ ऐसे में याद तुमको किया है ____ प्याला मुहब्बत का पिया है तुम आओ तो बात बन जाये ये रात , सुहागरात बन जाये मगर तुम आओगी नहीं वो आग बुझाओगी नहीं जो जल रही है लगातार हमारे सीने में मज़ा आता है शा... [पूरी पोस्ट]
writer AlbelaKhatri.com
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[20 Dec 2009 04:51 AM]

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