छूट रही पढ़ने की आदत

झारखंडी घनश्याम स्वाध्याय स्व उन्नति का आधार है, यह सभी जानते हैं। आत्मदीप प्रज्ज्वलित करने की दिशा में पुस्तकों से अच्छा कोई मित्र शायद ही हो। एक दशक पहले तक अध्ययन के दिनों में पत्र-पत्रिकाएं, जर्नल्स पढ़ने के लिए व्यक्ति समय निकाल ही लेता था। यह आदत में शुमार था।... [पूरी पोस्ट]
writer घन्नू झारखंडी
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[20 Dec 2009 01:54 AM]

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