पंखों की नेमत और उड़ने की कला

व्यंग्य व्यंग्य- प्रमोद ताम्बट कुछ कीडे़ होते हैं, उड़ने की कला का सही इस्तेमाल ही नहीं जानते। यूँ उड़ते हैं मानों आँख पर पट्टी बाँध रखी हो। उड़ते हैं, यहाँ टकराते हैं, उड़ते हैं, वहाँ टकराते हैं। इस टकराया-टकराई में मुमकिन है अपना सिर या कि हाथ-पैर भी तुड़ा बैठत... [पूरी पोस्ट]
writer vyangya

व्यंग्य

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[20 Dec 2009 00:49 AM]

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