ग़ज़ल - ये ख़ुदा ने है बक्शी तुम्हे
ये ख़ुदा ने है बक्शी तुम्हे ज़िन्दगी की इबादत करो फ़र्ज़ इंसानियत का है ये तुम सभी से मुहब्बत करो भीड़ में खो न जाना कहीं ख़ुद ही अपनी हिफाज़त करो दोस्ती ये सिखाती नहीं दोस्तों से सियासत करो जो लिखा है मिलेगा वही क्यूँ किसी से शिकायत करो मुझमें बचपन है...
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kavideepakgupta
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[19 Dec 2009 23:32 PM]



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