आज प्रस्तुत है अज्ञेय की कविता "याद उसकी"
जहाँ तक दीठ जाती है फैली हैं नंगी तलैटियाँ एक - एक कर सूख गये हैं नाले , नौले और सोते कुछ भूख , कुछ अज्ञान और कुछ लोभ में अपनी संपदा हम रहे हैं खोते ज़िन्दगी में जो रहा नहीं , याद उसकी बिसूरते लोकगीतों में कहाँ तक रहेंगे संजोते ? रचयिता : अज्ञेय प्रस्...
[पूरी पोस्ट]
AlbelaKhatri.com
30
8
0
8
4
[19 Dec 2009 20:26 PM]



Shuffle








