खुद को खुद से छलता पानी.....
जब भी रंग बदलता पानी. खुद को खुद से छलता पानी. पृथ्वी का अनमोल खज़ाना, उगती फसलें-चलता पानी. कहीं त्रासदी-कहीं ज़िन्दगी, मीलों-मील उछलता पानी. दुनिया भर ऐसे पसमंज़र, भूखे पेट-उबलता पानी. उस की मर्जी दे या ना दे, आंखें और छलकता पानी. - योगेन्द्र मौदगि...
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योगेन्द्र मौदगिल
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[19 Dec 2009 19:56 PM]



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