पतझड़

Anjaana Shahar ...Ajnabee Log.. भूल नहीं पाता हूँ पतझड़ मास को मैं जब तुम से जुदा होता हूँ ज्यों पत्ते शाख से टूटे मैं टूटता हूँ तुम से आशुकन लिए हुए, हवाओं के झोंको से उड़ता हुआ तेरा आँचल रह रह के सदा देता है बढते कदम यह मेरे एक बार जकड जाते हैं मैं रुक के देखता हूँ तेरा आंशु भरा... [पूरी पोस्ट]
writer आशु
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[25 Nov 2009 00:51 AM]

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