बातें.....
यह तमन्ना रहती थी मेरी, कि करते तुम से दो बातें, जो सकून दे दिल को मेरे, करते तमाम हम वोह बातें कुछ हम भी कह ना पाते थे, कुछ यह दुनिया भी जलती थी, जाने क्यों रोकती थी मुझ को, न करने देती थी क्यों बातें यही आरज़ू रहती थी मेरी, कि मिल जाये तूं वीराने मे...
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आशु
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[26 Nov 2009 00:05 AM]



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