कितना मुश्किल लगता है..
बीती बातों को भूल के जीना कितना मुश्किल लगता है, भंवर के बीच रखना सफीना कितना मुश्किल लगता है॥ नादाँ दिल भूले भी तो कैसे अपनी बीती यादों को, दिल के पन्नों से नाम का मिटना कितना मुश्किल लगता है॥ ग़मज़दा हो दिल तो कैसे खुशीयों को महसूस करे, अपनी ही तनह...
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आशु
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[09 Dec 2009 01:57 AM]



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