भँवरे की एक गूँज हिलाकर रख देती थी समूचा भुवन

कर्मनाशा त्रैमासिक पत्रिका 'बया' ( संपादक : गौरीनाथ) के जुलाई - सितम्बर २००९ के अंक में अपनी चार कवितायें प्रकाशित हुई हैं। हिन्दी ब्लाग की बनती हुई दुनिया के बहुत से पाठकों तक हो सकता है कि 'बया' की पहुँच न हो किन्तु यह एक अच्छी और पठनीय पत्रिका है जो अंतिका... [पूरी पोस्ट]
writer sidheshwer
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[19 Dec 2009 13:32 PM]

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