2-चक्र

सहज साहित्य(SAHAJ SAHITYA) मोना को सुबह ही सुबह खेलते देखकर महेश ने पत्नी को कनखियों से इशारा किया –'' देखो , मोना की रात भी कितना समझाया था कि सोने का वक्त हो गया है। खेल बंद करके होमवर्क पूरा कर लो। अब फिर सुबह ही सुबह...... '' वह क्रौंध से होंठ चबाता हुआ दूसरे कमरे में चला... [पूरी पोस्ट]
writer सहज साहित्य
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[19 Dec 2009 13:11 PM]

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