नारी
मैं किसी बंधन में बंधना नहीं जानती नदी के बहाव सी रुकना नहीं जानती तेज हवा सी गुजर जाये जो सर्र से मैं हूं वो मन जो ठहरना नहीं जानती। वो स्वाभिमान जो झुकना नहीं जानती करती हूं मान पर अभिमान नहीं जानती जो हाथ में आ के निकल जाये पल में मैं हूं ऐसा मुका...
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JHAROKHA
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[19 Dec 2009 12:24 PM]



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