एहसास

गठरी रात भर हम तो करवट बदलते रहे दिल के अरमान अश्कों में ढ़लते रहे । फूल घायल करेंगे नहीं इल्म था हम तो कांटों से बच के निकलते रहे । धूप में पांव जल न जायें कहीं घनी अमराइयों में ही चलते रहे । बात करनी बहुत थी ,मगर जब मिले शब्द निकले नही होंठ हिलते रहे । म... [पूरी पोस्ट]
writer अजय कुमार
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[19 Dec 2009 12:19 PM]

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