शहंशाह, भेड़िये और आतंक – शिवराम
शहंशाह, भेड़िये और आतंक – शिवराम
( a kavita poster by ravi kumar, rawatbhata)
शब्दों के कुछ समूह हमारी चेतना पर अचानक एक हथौडे़ की तरह पड़ते हैं, और हमें बुरी तरह झिंझोड़ डालते हैं. दरअसल हथौडे़ की तरह पड़ने और बुरी तरह झिंझोड़ डालने वाली उपमाओं क...
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रवि कुमार, रावतभाटा
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[19 Dec 2009 09:11 AM]



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