हर भाषा मेरी भाषा है

साहित्य-सहवास आशा लिखूं तो आशा है निराशा लिखूं तो निराशा है मुझ पर किसी इक भाषा का बन्धन क्यों हो ? हर भाषा मेरी भाषा है कविता और मोहब्बत सोच कर नहीं हो सकती होने के बाद सोचा जाता है भाषा का वस्त्र पहनाया जाता है और सिलसिला आगे बढ़ाया जाता है __ हो सकता है मैं गलत... [पूरी पोस्ट]
writer AlbelaKhatri.com
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[19 Dec 2009 08:16 AM]

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