एक व्यंग्य : अपना अपना दर्द....

हँसते रहो हँसाते रहो एक व्यंग्य : अपना अपना दर्द.. " आइए ! आइए ! स्वागत है भई श्याम; बहुत दिनों बाद इधर आना हुआ"-वर्मा जी ने आगन्तुक का स्वागत करते हुए कहा । वर्मा जी ,सचिवालय में लिपिक हैं ,साहित्यिक रुचि रखते हैं,हिंदी में कविता ,कहानी ,उपन्यास आदि पढ़ते रहते हैं।यदा-कद... [पूरी पोस्ट]
writer आनन्द पाठक
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[19 Dec 2009 05:10 AM]

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